उत्थान: समाज के अधिकारियों एवं कर्मचारियों का नैतिक, बौद्धिक, आर्थिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक विकास करना।
सद्भावना का विकास: कार्मिकों के बीच भाईचारा, सहयोग, आत्मविश्वास, आत्मनिर्भरता एवं आत्म-सम्मान की भावना को प्रोत्साहित करना।
अधिकारों की रक्षा: समाज के कार्मिकों के अधिकारों एवं उनके हितों की वैध (कानूनी) तरीकों से रक्षा करना।
शिक्षा में सहायता: आर्थिक रूप से कमजोर कार्मिकों के बच्चों को आगे बढ़ने में सहायता प्रदान करना तथा शिक्षा के क्षेत्र में आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराना।
प्रशिक्षण केंद्र संचालन: बच्चों की प्रतियोगी, तकनीकी एवं व्यावसायिक परीक्षाओं की तैयारी हेतु अन्य संस्थाओं के सहयोग से प्रशिक्षण केंद्र स्थापित एवं संचालित करना।
आवास (छात्रावास) व्यवस्था: समाज के अध्ययनरत बच्चों एवं कार्यरत महिलाओं के लिए छात्रावास (Hostel) का निर्माण एवं संचालन करना।
असहाय एवं विकलांग कल्याण: समाज के असहाय एवं विकलांग कार्मिकों के लिए कल्याणकारी योजनाएँ बनाकर उनका संचालन एवं क्रियान्वयन करना।
सेवानिवृत्त कार्मिक कल्याण: सेवानिवृत्त कार्मिकों के लिए वृद्धाश्रम की व्यवस्था करना, उसका संचालन करना तथा उनके लिए मनोरंजन के संसाधन उपलब्ध कराना।
मीडिया एवं जनसंपर्क: राज्य, भारत तथा विदेशों में पत्रकारों एवं मीडिया के माध्यम से समिति एवं उसके सदस्यों के हित में संबंध स्थापित करना तथा विकास हेतु आवश्यक जानकारी का आदान-प्रदान करना।
स्वास्थ्य एवं जनकल्याण शिविर: समिति द्वारा विभिन्न क्षेत्रों में निःशुल्क चिकित्सा शिविरों एवं जनकल्याणकारी शिविरों का आयोजन करना।
सामाजिक सुधार: समाज में व्याप्त कुरीतियों एवं बुराइयों को दूर कर सामाजिक सुधार के कार्य करना।
स्नेह मिलन एवं एकता: समाज के कार्मिकों में भाईचारा एवं स्नेह स्थापित करने हेतु समय-समय पर स्नेह मिलन समारोह आयोजित करना।
प्रकाशन एवं ज्ञान प्रसार: समाज के बंधुओं के लिए शैक्षिक, सामाजिक, नैतिक एवं बौद्धिक विकास हेतु पत्र-पत्रिकाओं का प्रकाशन करना।
योजना निर्माण एवं संचालन: समाज के विकास हेतु विभिन्न योजनाओं का निर्माण एवं संचालन करना।
सम्मान एवं सम्मेलन आयोजन: सेवानिवृत्त कार्मिकों के सम्मान हेतु प्रत्येक वर्ष सम्मेलन एवं सम्मान समारोह आयोजित करना।